Online gaming in covid pandemic
चर्चा में क्यों?
विगत कुछ दिनों में ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी कई ऐसी घटनाएं सामने आई है जो असल में चिंता का विषय है। कई बच्चों ने नए नए गेमिंग टूल्स खरीदने के लिए हजारों रुपए बर्बाद किए , तथा घरवालों की डांट के डर से आत्महत्या जैसा खतरनाक कदम उठा लिया।
बढ़ते उपयोग का कारण :
बदलती और स्मार्ट होती दुनिया के साथ-साथ बच्चों में अब ऑनलाइन गेमिंग के लिए दिलचस्पी बढ़ती जा रही है। कोरोना महामारी covid pandemic के इस दौर में अब ऑनलाइन पढ़ाई का चलन काफी बढ़ गया है ऐसे में बच्चों के हाथ में माता-पिता के गैजेट्स लग जाना बेहद आसान है। माता-पिता की नजरअंदाजी से बच्चे इन गैजेट्स पर ऑनलाइन गेम्स freefire pubg पर घंटों तक समय व्यतीत करते हैं और उन्हें इसकी लत सी हो जाती है।
बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव :
नींद से जुड़ी परेशानियां हो सकती है।
असल जिंदगी से दूरी बढ़ती जाती है।
जरूरत से ज्यादा गुस्सा व चिड़चिड़ापन होता है।
पर्याप्त नींद न लेने से एकाग्रता में कमी तथा याददाश्त कमजोर होती है।
गेम में हिंसा दिखाई जाती है और हथियारों का इस्तेमाल होता है जिससे बच्चों का स्वभाव भी हिंसक होता जाता है।
WHO की राय :
WHO ने जून 2018 में ऑनलाइन गेमिंग को एक मानसिक स्वास्थ्य विकास घोषित किया। WHO के अनुसार “गेमिंग डिसऑर्डर” गेमिंग को लेकर बिगड़ा नियंत्रण है जिसका दूसरी दैनिक गतिविधियों पर भी प्रभाव पड़ता है। WHO ने “इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीज” के ताजा अपडेट में यह भी कहा कि गेमिंग कोकीन और जुए जैसे पदार्थों की लत जैसी हो सकती है।
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